हम एक उदाहरण से जानेंगे कि ब्रांडेड चीज़ो की गणित क्या है और उससे छोटे व्यवसायों पर क्या असर पड़ा है ! मिसाल लेते है ब्रांडेड कपड़ो की, जिनका कपड़ा निम्न श्रेणी का होता है या यह कहे कि इनका जो मूल्य आप चुकाते है वो कहीं ज़्यादा होता है ! ऐसा मानते है की X एक छोटा रेडीमेड कपड़ो का व्यवसाय चलता है और शर्ट्स बनाता है ! अभी तक शर्ट्स की कटिंग के लिए उसके यहाँ पर दो टेलर-मास्टर आते है और सिलाई के लिए भी करीब ५० लोगों को रोज़गार दिया हुआ है ! उसका कच्चा माल करीब शहर की कपड़ा मंडी की कई दुकानों से आता है ! उसके तीन-चार सेल्स-मेन हैं और उसका उत्पाद सीधे-सीधे २०० से ३०० रिटेलर्स को जाता है ! उसके यहाँ पर मनुष्यों को मशीनों की तरह काम नहीं करवाया जाता और कामगार बिना तनाव के काम करते है ! खुद X दुकान पर सिर्फ़ ६-७ घंटे रहता है और बाकी समय परिवार के साथ बिताता है ! अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए वो एक ब्रांडेड रीटेल चेन से संपर्क करता है और वो उससे शर्ट्स खरीदने के लिए शर्तों के साथ एक अनुबंध करता है ! अनुबंध के तहत X को एक कटिंग मशीन, डिज़ाइनिंग कंप्यूटर, और पुरानी की जगह नयी मशीन लगवानी होती है जिसे वह खुशी-खुशी कर्ज़ा ले कर कर लेता है ! शर्तों के तहत कंपनी उसकी उत्पादकता का मूल्यांकन कर उसे कुछ निर्धारित % मुनाफ़े का हिस्सा देगी ! कच्चा माल भी अब कंपनी द्वारा निर्धारित उत्पादकों से ही लेना होता है ताकि लागत और कम आए ! शर्ट्स पर अब बनाने वाले की नहीं, परंतु रीटेलर्स का ब्रांड नाम होता है ! देखने में तो यह सब अच्छा लगता है परंतु, X का जीवन बदल गया है :
* पहले जो उसके कार्य में जिंदगी का रचनात्मक पहलू जुड़ा था, वो चला गया ! अब रीटेलर्स के निर्देश पर वो तैयार करना पड़ता है !
* पहले जो कर्मचारियों से मानवीय रिश्ता था वो उत्पादक आधारित हो गया है !
* क़र्ज़ के कारण ब्याज़ का बोझ !
* X को जो कच्चा माल देने और लेने वाली चेन थी, वह अब टूट चुकी है !
* ज़िंदगी में एकरूपता आ गयी है जिससे कुछ लोग कहेंगे कि जीवन में अनुशासन आ गया है, पर सही मायने में तो जीवन का अनुशासन चला गया है !
* कर्मचारियों को छुट्टी ना मिलने के कारण चिड-चिड़ापन आ जाता है !
* और सबसे बड़ा नुकसान जो हुआ है, वह है कि X के व्यापार की चेन में करीब ३०० परिवार और १५०० लोग जुड़े थे, वो सारा का सारा व्यापार एक रीटेल चेन और कुछ मुट्ठी भर लोगों ने हथिया लिया है !पैसे पर किसी एक का नियंत्रण होना और बाकी सब उसकी कट्पुतली... क्या यह सही है? अपने विचार हमें लिख भेजिए !
दिनेश कोठारी
<dineshkothari1@gmail.com>
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