27.10.10
जसो अन्न वसो मन
नमस्कार मेरे प्रिय दोस्तों, मैं पिछ्ले कुछ सालों से स्वास्थ्यपूर्ण भोजन और स्थानीय अनाजों पर प्रयोग कर रहा हूँ और इसी के साथ हमनें एक समूह की स्थापना कि जिसका नाम है ' जसो अन्न वसो मन' ! क्या है जसो अन्न वसो मन? जो हम खाते है, वही हम बनते है ! जो हम खाते है वही हमारे दिल, दिमाग़ और भावनाओं का हिस्सा बनता है ! हम मानते है कि एक सजीव ही दूसरे सजीव को पोषण दे सकता है ! इसलिए हम अपने भोजन को कम से कम प्रोसेस करते है और पकाते है ! हम मानते है कि भोजन ऐसा होना चाहिए जो जल्दी पच सके, वरना पेट में रहकर सड़ता है और ज़हर पैदा करता है ! शरीर से जहर फेंकने की प्रक्रिया एक ऐसा रूप लेती है जिसे हम बीमारी कहते है ! हमें यह देखना है कि हमारे शरीर में ज़हर ना बने और शरीर से ज़हर बाहर निकलने की प्राकृतिक प्रक्रिया में कोई रुकावट न हो ! इसी सोच को लेकर हम ने कई प्रयोग किए है और कई उत्सव और सम्मेलनों में इस प्रकार का खाना बनाया और अनुभव किया कि नियमित रूप से इस तरह के भोजन से हमारे अपने स्वास्थ्य में काफ़ी बदलाव आया है तथा कई लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है ! इस भोजन की विशेषतायें : * कच्चा एवं भाप से पकाया हुआ :प्राकृतिक रूप से अनाज, सब्ज़ियों में एन्ज़ाइम्स होते है, जो हमारी पाचन क्रिया के लिए महत्वपूर्ण होते है ! खाने को उबालने, तलने एवं माइक्रोवेव में पकाने से उनके एन्ज़ाइम्स एवं पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते है ! अतः हम भोजन को अधिकाधिक विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट सलाद के रूप में तथा भाप से पकाते है ! * देशी गुड़ का प्रयोग: सफेद शक्कर हमारे खून में शक्कर की मात्रा को बढ़ाती है जिसकी वजह से डयबिटीज़ जैसी बीमारियाँ होती है ! शक्कर बनाने की प्रक्रिया में बहुत सारे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है ! हमें इसके बजाय भोजन में केमिकल रहित देशी गुड़ इस्तेमाल करना चाहिए ! * स्थानीय एवं विविध प्रकार के अनाज : हमारे बुजुर्ग लोग अपने भोजन में कई प्रकार के अनाज खाते थे, लेकिन पिछ्ले ३० सालों से केवल गेहूँ के उपभोग पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है ! गेहूँ में ग्लूटिन नामक प्रोटीन होता है जिसका पाचन बहुत मुश्किल से होता है ! इसलिए हम गेहूँ के बजाय मक्का, बाजरा, ज्वार, राजगीरा, सांवा एवं लाल चावल का प्रयोग करते है जी पचाने में आसान होने के साथ-साथ पौष्टिक भी होते है ! * सूखे मेवे का प्रयोग : गाय का दूध संपूर्ण आहार है, पर केवल उसके बछढ़े के लिए ! प्रकृति में कोई भी जीव अपनी माँ के अलावा किसी और का दूध नहीं पिता है और एक उम्र के बाद वह दूध का सेवन बिल्कुल बंद कर देता है ! तो हम भी प्रयास करते है कि प्रकृति में उपलब्ध सूखे मेवों का दूध इस्तेमाल करें, जैसे मूँगफली एवं नारियल का दूध ! * तेल बिल्कुल नहीं : तिलहनी बीजों (तिल, मूँगफली आदि ) में उनको पाचाने के लिए आवश्यक एन्ज़ाइम्स मौजूद होते है लेकिन तेल बनाने की प्रक्रिया में एन्ज़ाइम्स एवं फयबर्स (रेशे) ख़त्म हो जाते है ! * कचरा मुक्त : डिब्बा बंद भोजन के प्रचलन एवं आधुनिक भोजन के तौर-तरीकों में इतना प्लास्टिक, थर्माकौल एवं हानिकारक कबाड़ काम में लाया जाता है जो दिनों-दिन हमारे आस-पास शहर एवं संपूर्ण धरती के लिए बहुत बड़ा बोझ बनता जा रहा है ! हम अपने भोजन तथा पूरे आयोजन को कचरा मुक्त बनाने का प्रयास कर रहे है ! हम आपको आमंत्रित करते है कि अगर आप अपने किसी कार्यक्रम, मीटिंग, सम्मेलन, कार्यशाला, उत्सव, निजी कार्यक्रमों के आयोजन में पौष्टिक भोजन बनवाना चाहते है या अधिक समझ बढ़ाना चाहते है तो संपर्क करें :
- मनोज प्रजापत
09928443548, 09636430162
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