नये रूप और नये प्रयोगों के साथ मिट्टी फिर से हाज़िर है आपके सामने ! इस अंक का खाका वारली चित्रकलाओं से भरपूर है ! वारली कला एक प्राचीन भारतीय कला है जो की महाराष्ट्र की एक जनजाति वारली द्वारा बनाई जाती है ! और यह कला उनके जीवन के मूल सिद्धांतो को प्रस्तुत करती है ! इन चित्रों में मुख्यतः फसल पैदावार ऋतु, शादी, उत्सव, जन्म, और धार्मिकता को दर्शाया जाता है ! यह कला वारली जनजाति के सरल जीवन को भी दर्शाती है ! वारली कलाओं के प्रमुख विषयों में शादी का बड़ा स्थान हैं ! शादी के चित्रों में देव, पलघाट, पक्षी, पेड़, पुरुष और महिलायें साथ में नाचते हुए दर्शाए जाते है !
वहीं, खेती से पैदावार के समय श्रमिक जुताई करते हुए दर्शाया जाता है ! हाल ही के दिनों में मेरा उदयपुर जाना हुआ जहाँ स्वराज यूनिवर्सिटी नाम के एक स्व-चलित व स्व-निर्धारित कार्यक्रम से मेरा जुड़ना हुआ (www.swarajuniversity.org)! इस कार्यक्रम के तहत हम उदयपुर शहर से दूर एक गाँव नयाखेड़ा में एक आश्रम में हमारा कॅंपस था ! उन्हीं दिनों में हुए एक रोचक किस्से का वर्णन मैं करूँगा ! एक दिन हमें यह चुनौती दी गयी कि हमें शाम में दो के समूह में हो कर बिना पैसे और मोबाइल के गाँव जाना है और गाँव वालों से रिश्ता बनाकर उनके घर से रात को खाना खा कर आना है ! मैं सह-खोजी सखी के साथ गाँव गया ! शुरुआत में तो हमारे दिलों-दिमाग़ में सिर्फ़ यही चल रहा था कि भोजन की बात कैसे करेंगे, परंतु गाँव वालों की मेहमान-नवाज़ी से हमें शर्मिंदगी का एहसास हुआ ! वो हम अजनाबीयों को अपनी ज़िंदगी और गाँव के बारे में सब इतना खुल कर बताते, तो हमें शर्म आती कि अगर ऐसा ही शहर में हुआ होता, और कोई हमारे घर पर आता, तो उनके सवालों का जवाब देना तो दूर की बात, उन्हे पानी तक नहीं पिलाया जाता, उल्टा शक भरी निगाहों से घर के बाहर से ही चलता बना कर देते ! उस दिन हम गाँव के बच्चो के साथ खेले और उन बच्चो ने हमें गाँव भी घुमाया ! उन बच्चो की सादगी और मासूमियत देख लगा कि काश...मैं भी वैसा हो पाता ! शहर की चिल्ला-चिल्ली और भागम-भाग वाली ज़िंदगी से कोसो दूर गाँव का सादगी भरा जीवन सुकून दे रहा था और शहरी सुख सुविधाओं के बिना भी उनके चेहरे की चमक और खुशी देख अब मेरा पेट बिन भोजन के तृप्त हो चुका था ! उन्होने हमें मक्के की रोटी और सब्ज़ी खिलाई, जो कि लाजवाब थी...वह सुकून भरा माहौल उस परिवार और उन बच्चो के साथ हमेशा यादगार रहेगा !
-राहुल हासिजा
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