हाल ही में १२ से १६ फ़रवरी को इंदौर में स्नेह(इंदौर) और शिक्षांतर(उदयपुर) ने 'साथ में सीखते परिवार' का आयोजन किया, जिसमें भारत के कई परिवार शामिल हुए ! इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परिवारों का एक दूसरे से सीखना था ! यह परिवार एक मायने में अलग थे ! इन्होने अपने परिवार में कुछ ऐसे प्रयोग किए थे जो कि काबिल-ए-तारीफ़ थे ! इन सब परिवारों के बच्चे स्कूल नहीं जाते ! उदयपुर से आए मनीष जैन और विधि जैन की ८ वर्ष पुत्री कन्कु कभी स्कूल नहीं गयी ! वह प्राकृतिक रंग बनाती है, घर के पास चाट के ठेले वाले से चाट बनाना सीखती है ! अहमदाबाद से आए २२ वर्षीय रुचिर कभी स्कूल नहीं गये, वह आज एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर हैं, प्रकृति पर एक पत्रिका(www.care4nature.org) भी निकालते है ! अहमदाबाद से ही आई सुमि ने अपने दोनो बच्चों कुदरत और अजन्मया को कभी स्कूल नहीं भेजा और ना ही कभी कोई दवाई या टीका लगवाया ! उड़ीसा से आए श्याम और बिंदिया ने पिछले एक साल से अपने बच्चो को स्कूल भेजना छोड़ दिया ! श्याम ने, जो खुद आई.आई.एम. और आई.आई.टी. से पढ़े हुए है, अपने बच्चो को स्कूल के बंधन से मुक्त किया और उन्हे वापस सृजनात्मकता पाने का मौका दिया !
उदयपुर से आए २३ वर्षीय मनोज और २२ वर्षीय विकी ने भी स्कूली शिक्षा के बंधनों को तोड़ा और खुद की केटरिंग शुरू की, जिसका नाम उन्होने 'जसो अन्न, वसो मन' रखा ! यहाँ उन्होने बिना तेल इस्तेमाल किए व क्षेत्रीय अन्न जैसे बाजरा, आदि द्वारा भोजन बनाया ! उदयपुर से आए १७ वर्षीय रोहित ने नारियल के टुकड़ो और छिल्को का प्रयोग कर उन से शिल्प-वस्तुएँ बनाई ! उसी प्रकार दिल्ली से आए रजत और अहमदाबाद से आए रवि और ख्याति भी अपने बच्चो को स्कूल नही भेजते ! अंजड़ से आए मुकेश जाट की ५ वर्षीय बच्ची उन्हे खेती-बाड़ी व वार्मी-कंपोस्ट बनाने में मदद करती हैं ! छतरपुर से आए संजय और दमियन्ती ने स्व-उपचार पर अपने प्रयोगों के बारे में जानकारी दी ! इन सब लोगों ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि इन्हें लगा कि शिक्षा बंद कमरों में नहीं, शिक्षक या किताबो में नहीं, परंतु शिक्षा वह है जो कि बच्चे या बड़े मन से सीखें ! आज की स्कूली शिक्षा हमें बने-बनाए ढाँचों में फिट करना चाहती है, जिससे हमारी रचनात्मकता को ठेस पहुचती है और हम अपने आप को समझ ही नहीं पाते ! इन परिवारों ने अपने पहनावे और ख़ान-पान में भी काफ़ी बदलाव किए ! सम्मेलन में सबने अपने भोजन पर भी प्रयोग किए ! इस सम्मेलन में कुछ और अनोखे प्रयोग किए गये जैसे कि साइकल से मिक्सर चलाया, जिससे ये सीखा हमने की बिजली की ज़रूरत को इंवार्टर लगाने के बजाय अपने शरीर की उर्जा का इस्तेमाल कर सकते है ! इंदौर शहर से कई परिवार आए जिन्होने इन प्रयोगों को समझा और आपसी विचारों का आदान—प्रदान किया!
- मिट्टी टीम
13.3.10
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