टी.वी. का अधिकांश समय विज्ञापनों की भेंट चड़ा होता है, वहीं अख़बारों के पन्नों में ख़बरे कम विज्ञापन ज़्यादा होते हैं ! विज्ञापन हममें यह अहसास पैदा करते है कि जो हमारे पास है वह आज के हिसाब से ठीक नहीं ! दिन में ३००० बार हमें यह बताया जाता है कि हमारे बाल ठीक नहीं, हमारी खाल ठीक नहीं, हमारी कार ठीक नहीं, हमारा खाना ठीक नहीं, हमारी वेश-भूषा ठीक नहीं, हम ठीक नहीं ! अगर हम श्यामवर्ग (साँवले रूपरंग) के हैं तो हममें अपने रंग के प्रति तिरस्कार पैदा किया जाता है और यह बताया जाता हैं कि सिर्फ़ गोरे लोग ही इस दुनिया में तरक्की कर सकते है ताकि उनका गोरेपन का उत्पाद हमें बेच सकें ! ज़्यादातर विज्ञापन बच्चो को निशाना बनाकर बनाए जाते हैं जो बच्चो के हृदय में लालच के बीज बोते हैं क्योंकि बच्चे जब उस चीज़ को खरीदने की ज़िद्द करते है, तो पालकों को विवश हो कर वह लेनी ही पड़ती है ! हममें यह भ्रम पैदा किया जाता है कि दूध में Bournvita और Complan के उनके उत्पाद का पावडर डालने से बच्चो का विकास जल्दी होता है जो कि सरासर झूठ है ! पहले ज़माने में क्या लोगों का विकास नहीं होता था? इन उत्पादो के साथ मुफ़्त ऐसी चीज़े दी जाती हैं जो बच्चो को आकर्षित करती है जैसे कि खिलोने, स्टिकर, आदि ! एक विज्ञापन बनाने वाले ने कहा कि "जब बच्चे को कुछ उत्पाद बेचा जाता है और उसे नहीं मिलता है, तो वह खुद को ज़मीन पर फेंक देता है, रोता है, ऐसी प्रतिक्रिया किसी वयस्क से नही मिल सकती" ! इसका अर्थ सिर्फ़ यही है कि विज्ञापन बच्चो पर केंद्रित किए जाते हैं ! नहीं तो क्या कारण है जो बच्चो का इस्तेमाल Insurance और तकनीकी उत्पादो आदि के विज्ञापनों में किया जाता है ? बच्चो को विज्ञापन की आग में झोंक देना ही विज्ञापन वालों का मकसद है !
अगर गौर किया जाए तो लगभग हर टी.वी., फ्रिज, और अन्य घरेलू उत्पादों के विज्ञापन में सिर्फ़ एकल परिवार को उपयोग करते हुए खुश दर्शाया जाता है ! संयुक्त परिवार इन विज्ञापनों से गुम होते हैं ! इसका अर्थ यह है कि कंपनियाँ यही चाहती है कि हमारा घर टूटे क्योंकि जबतक एक संयुक्त परिवार है, उस घर में सिर्फ़ एक टी.वी., एक किचन, और सब एक ही सामान की आवश्यकता है, पर जब इस परिवार के टुकड़े होते हैं तो टुकड़ो के हिसाब से उत्पादो की माँग में वृद्धि हो जाती है ! कंपनियों का फ़ायदा हमारे परिवार टूटने में ही है ! जब ओनिडा टी.वी. को भारत के बाजार में उतरा गया तो उसका नारा था ‘NEIGHBOURS ENVY OWNERS PRIDE’ यानी ‘उपभोक्ता का गर्व उनके पड़ोसी की जलन’ ! पड़ोसियों के बीच में एक दूसरे के प्रति द्वेष और जलन का माहौल पैदा करना इस विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य था ! 'शर्तें लागू' लिख कर उत्पाद की आधी बातें छुपा दी जाती हैं ! ज़रूरत है इस विज्ञापन की आग की लपटों से समाज को बचाने की ! हमें प्रलोभनों के बहकावे में ना आकर उत्पादों के कम से कम प्रयोग ही करना चाहिए ! आप आमंत्रित हैं हमसे अपने अनुभव या सुझाव बाँटने के लिए ! अगर आप विज्ञापन जगत की कड़वी सच्चाई जानना चाहते है तो www.adbusters.org पर देख और समझ सकते हैं !
- राहुल हासिजा
14.12.09
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें