अरी बहन सुनो, आज हम दीवाली की खरीददारी कर ए.सी. व टी.वी. लाए ! अजी आज हमारे पड़ोसी दीवाली के मौके पर नये सामान लाए हैं, हम चल कर आज और भी बड़ा ए.सी. व टी.वी लाते हैं ! यह है मेरा दिखावे का समाज...जहाँ ए.सी., टी.वी., फ्रिज, कार आदि घर की प्रतिष्ठा व सम्मान के प्रतीक माने जाते हैं ! यह माना जाता है कि इन वस्तुओं के होने से परिवार का औदा समाज में उँचा होता है ! यह दिखावे का खेल शुरू तो होता है, परंतु ख़त्म होने का नाम नही लेता ! यही कारण है की दीवाली में लक्ष्मी माँ आने कि बजाय चले जाती हैं ! इन वस्तुओं से खुशी की प्राप्ति सिर्फ़ २ दीनो की है, क्योंकि २ दिन बाद पड़ोसी हमसे बड़ी टी.वी. खरीद लेगा ! गाँधीजी ने कहा था कि इस दुनिया में हर किसी की ज़रूरतों के लिए तो सब वस्तुएँ हैं, पर उनके लोभ के लिए नहीं !
इस दीवाली क्यों ना अपने अंदर के खरीददार शैतान को शांत करें और महसूस करें कि खुशी इन वस्तुओं के भोग में नहीं, पर आपके परिवार के साथ बिताए पलों में है ! क्यों ना अपने हाथों से कुछ बनाकर किसी को भेंट करें और महसूस करें उस अपरंपार खुशी को जो इस दीवाली में और भी मिठास भर देगी ! अगर आपका पुराना टी.वी., फ्रिज, मोबाइल, कंप्यूटर आदि सही अवस्था में है तो फिर नये खरीदने की क्या आवश्यकता ! अगर आपको अपने पैसों का निवेश कहीं करना ही है तो क्यों ना अपने पड़ोसियों के साथ मिल कर अपने पास के बगीचे को अपने बच्चो के लिए खेलने योग्य बनाए या फिर संगीत और नृत्य सभा का आयोजन कीजिए जहाँ आप अपने परिवार के साथ खुशियों के पल बिता सके ! हम से अपने अनुभव बाटियें कि किस प्रकार आपने यह दीवाली कुछ अलग ढंग से मनाई ! आपके इस विषय पर सुझाव सदेव आमंत्रित हैं! आप सब को दीवाली एवं नये वर्ष की ढेरों शुभकामनायें !
- राहुल हासिजा
13.12.09
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