यह चित्र बनाया तो दो बच्चो ने है, पर इसमें छुपा सच बड़ों-बड़ों को हिला कर रख दे ! कंपनियों से मिलते बल से सरकार आम जनता को उखाड़ने पर आतुर है ! जो आज़ादी से पहले East India Company ने किया, वही आज की कंपनियाँ कर रही है, फ़र्क सिर्फ़ इतना कि आज हमारा जीवन इन कंपनियों के उत्पादों के इर्द गिर्द घूमता है और हम तन-मन से उन्हे लगा कर बैठे है ! मुझे विदेशी उत्पाद या फिर विदेशी कंपनियों से कोई बैर नहीं, परंतु जब उनकी वजह से मेरे देश के लोग बेघर हो जाएँ तो यह निंदनीय हैं ! वो कोक-पेप्सी हो, मानसंटो हो या फिर हमारे देश की बड़ी कंपनियाँ जैसे रिलाइयन्स, टाटा आदि ! अगर हम टाटा नेनो खरीदते है तो हम अपने हाथ उस खून से रंग देंगे जो सिंगूर(कलकत्ता) में मारे गये लोगों का है जो टाटा नेनो के उत्पादन कारखाने के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे थे ! उनकी बेशक़ीमती ज़मीन को ज़बरदस्ती छीन कर हमारे लिए सस्ते सपने बनाए जा रहे थे ! आदिवासियों की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा कर यह कंपनियाँ अपनी तिजोरियाँ भर लेती हैं ! पेप्सी-कोक तो हम गप-गप करके पी जाते हैं, पर यह नहीं सोच पाते कि हर दिन इनके उत्पादन कारखानें १५०-२०० करोड़ लीटर शुद्ध पीने का पानी गटक जाते हैं ! हमारे ही पानी में रसायन मिला कर हमें ही बेच दिया जाता है और हम इसे style statement बताकर खुद अपना ही शोषण कर जाते है ! ज़रूरत है कि हम इन कंपनियों का बहिष्कार करें और वैकल्पिक उत्पादों का प्रयोग करें !
चित्र -सुष्मित दावानी और हृत्विक दावानी
लेख - राहुल हासिजा
लेख - राहुल हासिजा


